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हमारी अपनी कहानी का एक नया एपिसोड हर रोज़ — AI से लिखा और प्रकाशित होने से पहले जाँचा हुआ।

भटकती गलियाँ · सीज़न 1 · एपिसोड 5

वह गली जिसने साँस रोक ली

AI से लिखा और प्रकाशित होने से पहले जाँचा हुआ। यह काल्पनिक कहानी है: इसके पात्र और जगहें मनगढ़ंत हैं।

अब तक की कहानी

मैरोविक में हर आधी रात को गलियाँ अपनी जगह बदल लेती हैं, जब तक वेफ़ाइंडर उन पर स्टिलस्टोन की चॉक से निशान न लगा दें। नौसिखिया आइलो ब्रैंडल को पता चला है कि गलियाँ उसकी बात सुनती हैं, और कल रात उसने बेकर्स माइल से घर लौट आने को कहा था। अब उसे महसूस हो रहा है कि लूज़ क्वार्टर की एक गली, जहाँ कोई चॉक नहीं लगाता, उसकी ओर मुड़ रही है।

आइलो दोपहर तक सोती रही, जो किसी भी वेफ़ाइंडर की नौसिखिया को नहीं करना चाहिए। जब वह जागी, तो उसके जूते अब भी पैरों में थे और एक बकरा उसके कंबल पर खड़ा उसके नक़्शे का कोना चबा रहा था।

"इस हफ़्ते का यह तीसरा नक़्शा है," उसने मॉप से कहा। मॉप ने बड़ी शान से निगल लिया और अगला ढूँढने लगा।

मास्टर फ़ेन अगले कमरे में चार तकियों के सहारे लेटी थीं। उनकी खाँसी ऐसे खड़खड़ा रही थी जैसे कोई जंग लगा फाटक। "बेकर्स माइल घर लौट आई है," उन्होंने भर्राई आवाज़ में कहा। "टैमसिन ने एक बन भेजा था। मॉप थैली समेत खा गया। मैंने कुछ नहीं खाया, क्योंकि मैं तो शहीद हूँ।"

आइलो हँस पड़ी, फिर चुप हो गई। "मास्टर, कोई चीज़ मुझे अपनी ओर खींच रही है। लूज़ क्वार्टर की एक गली। ऐसा लगता है जैसे कोई मेरी आस्तीन खींच रहा हो।"

फ़ेन कुछ पल चुप रहीं। "लूज़ क्वार्टर में कोई चॉक नहीं लगाता," उन्होंने कहा। "वहाँ के लोगों को यही पसंद है, या कम से कम वे ऐसा कहते हैं। जाकर देख आओ। अकेली मत जाना, और अँधेरा होने से पहले लौट आना।" उन्होंने अपनी चालीस जेबों में से एक में हाथ डाला और चॉक का एक टुकड़ा निकाला। "यह तुम्हारी घबराहट के लिए है। तुम्हें इसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी। फिर भी रख लो।"

आइलो ने टुकड़ा एक जेब में रखा और अपनी टिन की सीटी दूसरी जेब में। वह हमेशा की तरह अपने क़दम गिनने लगी। मॉप नाक ऊँची किए आगे-आगे दुलकी चाल से चल रहा था, मानो सुरक्षित पत्थर चुनना उसे जन्म से आता हो।

दिन की रोशनी में लूज़ क्वार्टर कुछ और ही लग रहा था। मकान दोस्ताना ढंग से तिरछे झुके थे। कपड़े सुखाने की रस्सियाँ एक छत से दूसरी छत तक जा रही थीं, उन गलियों के आर-पार जो आपस में मेल ही नहीं खाती थीं। आइलो ने एक बार सीटी बजाई। गूँज धीमी और डगमगाती हुई लौटी, वैसी ही जैसी उन गलियों से लौटती है जो आज रात जगह बदलने वाली हैं। हर दिशा में सारी गलियाँ ऐसी ही आवाज़ दे रही थीं।

बस एक को छोड़कर। जैसे ही आइलो हरे-भूरे पत्थरों वाली एक संकरी गली में मुड़ी, उसकी गूँज तीखी और तेज़ लौटी, मानो गली ने साँस रोक रखी हो।

"यह तुम कर रही हो," ऊपर से एक आवाज़ आई।

छत की मुँडेर पर एक लड़की बैठी थी, गोद में गाँठों वाली रस्सी का गुच्छा रखे। वह कोई दस साल की लग रही थी और उसकी नाक पर कालिख का एक धब्बा था। "मैं पिम हैरो हूँ। यह हॉलिन लेन है, और यह कभी टिककर नहीं रहती। पूरे दिन काँपती रहती है, तूफ़ान से पहले के कुत्ते की तरह। अब इसे देखो।" उसने हाथ हिलाया। "यह मेज़ की तरह अकड़ गई है। तुमने क्या किया?"

"कुछ नहीं," आइलो ने कहा। "मैं बस अंदर आ गई।" उसके पैरों के नीचे पत्थर गुनगुने थे, ठीक वैसे ही जैसे कॉबलर्स रो पर उसका नन्हा-सा निशान था।

पिम पानी के पाइप से फिसलकर उसके सामने आ कूदी। उसने मॉप को देखा, फिर आइलो की चॉक से सनी आस्तीनों को। "तुम वेफ़ाइंडर हो। तुम हम पर चॉक लगाने आई हो।"

"मैं नौसिखिया हूँ, और मेरी चॉक कभी टिकी ही नहीं," आइलो ने कहा। मॉप के सिवा उसने यह बात पहले कभी किसी से ज़ोर से नहीं कही थी। अजीब लगा, पर उतना बुरा नहीं जितना उसने सोचा था। "मुझे नहीं लगता कि यहाँ चॉक का मामला है।"

पिम ने होंठ चबाए। "तो बिना चॉक के करो। हॉलिन लेन को टिका दो। हर सुबह मेरी माँ शहर के दूसरे छोर पर जागती है और दो घंटे पैदल चलकर बाज़ार पहुँचती है। अगर यह गली अपनी जगह रहे, तो वह रात के खाने तक घर आ जाएगी।"

आइलो ने हाँ कहने के लिए मुँह खोला। वह महसूस कर सकती थी कि यह कितना आसान होगा। उसे बस गली से कहना था, और वह सुन लेती। पर गली उसके जूतों के नीचे बहुत हल्के से काँप रही थी, और यह उस गली का काँपना नहीं था जो चाहती हो कि उसे बताया जाए कि क्या करना है।

"रुको," उसने कहा। वह घुटनों के बल बैठी, गुनगुने पत्थरों पर हथेली सपाट टिकाई, और फिर उसने वह किया जो पहले कभी नहीं आज़माया था। उसने गली से कहीं जाने को नहीं कहा। उसने पूछा कि वह क्या चाहती है।

काफ़ी देर तक कुछ नहीं हुआ। फिर उसके हाथ के नीचे के पत्थर एक के बाद एक और गुनगुने होते गए, एक पतली लकीर में जो गली के साथ-साथ चलती हुई आख़िरी मकान के पार दूर निकल गई। पिम की साँस अटक गई। मॉप एक बार मिमियाया और अपने खुर जमाकर उसी तरफ़ मुँह करके खड़ा हो गया जिधर वह गुनगुनी लकीर इशारा कर रही थी।

"यह तो शहर के किनारे की तरफ़ है," पिम ने फुसफुसाकर कहा। "यह गैप की तरफ़ है।"

आइलो की गिनती गड़बड़ा गई और वह इकतालीस पर अटक गई। उसने दोबारा शुरू नहीं की। गली के आख़िर में, छतों के बीच दूर, कोहरे की एक भूरी दीवार ऐसे हिली जैसे कोई नींद में करवट ले रहा हो।

"यह हर रात वहीं जाने की कोशिश करती रही है," पिम ने धीरे से कहा। "मैं तो हमेशा यही समझती रही कि बस भटकती रहती है।"

"मुझे नहीं लगता कि यह भटक रही है," आइलो ने कहा। उसने चॉक का टुकड़ा पिम के हाथ में थमा दिया, क्योंकि यह उसके पास होना चाहिए जो गली के मिज़ाज जानती हो। "इसे आज रात के लिए रखो, अगर मैं ग़लत निकली तो। मैं घंटा बजते ही आऊँगी और इससे ठीक से पूछूँगी। मैं यह वादा नहीं करूँगी कि यह रुकेगी, और यह भी नहीं कि यह जाएगी। मैं बस सुनने का वादा करती हूँ।"

पिम ने टुकड़े को उँगलियों में घुमाया। फिर उसने एक बार सिर हिलाया, जैसे कोई ऐसी गाँठ बाँध रहा हो जिसे वह रखना चाहता है। उनके नीचे हॉलिन लेन ने साँस छोड़ी, और ऊपर कपड़े सुखाने की रस्सियाँ बहुत धीरे-धीरे झूलने लगीं।

आज के लिए बस इतना ही।

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